Bachendri Pal In Hindi Essay

Bachendri Pal Biography in Hindi :-  दोस्तों जितनी चदर हो उतने ही पैर पसारने चाहिए ये कहावत अब पुरानी हो चुकी है अब तो जितने लम्बे आपके पैर हैं उतनी लम्बी चदर खरीदने का समय है | यहाँ चदर से मेरा मतलब सपनों से है | जीवन में प्रत्येक व्यक्ति का कोई न कोई सपना जरुर होता है मेरा भी है आपका भी होगा | परन्तु जब हम अपने सपनों के बारे में किसी को बताते हैं या उस सपने को साकार करने के लिये काम करते हैं तो लोग अक्सर हमारा मजाक उड़ाते हैं और हमारा विरोध करते हैं |

और अगर आपका सपना कुछ ऐसा करने का है जिसको आपके आस-पास आज तक किसी ने नही किया या फिर पूरी दुनिया में बस कुछ गिने चुने लोगो ने ही किया हो तो ऐसे में आपका विरोध होना लाजमी है |

कुछ ऐसा ही सपना देखा था भारत की प्रथम महिला पर्वतारोही बछेंद्री पाल जी ने |

दोस्तों कहा जाता है की जैसा हम देखते हैं और सुनते हैं वैसे ही हम बन जाते हैं और यह बात बछेंद्री पाल की कहानी में बिल्कुल सही साबित होती है |

बछेंद्री पाल जी उत्तराखंड से सम्बन्ध रखती हैं जहाँ पर अक्सर देश – विदेश से लोग पर्वतारोहण के लिए आते रहते हैं | बचपन में उन पर्वतारोहियों को देखकर बछेंद्री पाल जी के मन में भी पर्वतारोही बनने की इच्छा छ्लांगे मारने लगी थी | और घर – परिवार वालो के जबरदस्त विरोध के बावजूद उन्होंने कुछ ऐसा कर दिखाया की आज उनको पूरी दुनिया भारत की पहली महिला पर्वतारोही और विश्व की पांचवी महिला पर्वतारोही  के नाम से जानती है |

तो चलिए दोस्तों इस लेख में हम Bachendri Pal Biography in Hindi में पढ़ते हैं और उनके प्रारम्भिक जीवन , शिक्षा , करियर और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानते हैं

Bachendri Pal Biography in Hindi in Short

नाम :-  बछेंद्री पाल

जन्म :- 24  May  1954

गाँव :-  नकुरी उत्तराखंड

पिता का नाम :- किशनसिंह पाल

माँता का नाम :- हंसा देवी

शिक्षा :-  स्नातक , एम ए , बीएड  और  नेहरु इंस्टिट्यूट ऑफ़ माउंटेनियरिंग से पर्वतारोहण में कोर्स

बछेंद्री पाल जी का प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा

बछेंद्री पाल जी का जन्म 24 मई 1954 को उत्तराखंड की हरी भरी वादियों से घिरे हुए गाँव नकुरी में हुआ था | उनके पिता का नाम किशनसिंह और माता का नाम हंसा देवी था | किशनसिंह जी एक छोटे व्यापारी थे जो भारत और तिब्बत के बिच में घरेलू सामान का आदान प्रदान करते थे |

बछेंद्री पाल अपने पांच भाई बहनों में तीसरे नंबर की सन्तान थी और बचपन से ही मजबूत और उत्साही थी अपने इसी स्वभाव के कारण वे शिक्षा और खेलकूद दोनों ही छेत्रो में आगे रहती थी | खेलकूद और पर्वतारोहण में उनकी रूचि का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है की स्कूल में एक पिकनिक के दौरान उन्होंने 400 मीटर की चढाई केवल 12 साल की आयु में बड़ी ही आसानी और सफलतापूर्वक ढंग से पूरी की थी |

परन्तु इसे हमारे देश का दुर्भाग्य कहें या फिर शिक्षा की कमी और छोटी सोच का नजरिया की इतने उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद भी गाँव में रहने वाले हर माता-पिता की तरह बछेंद्री पाल के माता पिता भी उनको आगे नही पढ़ाना चाहते थे |

परन्तु बछेंद्री पाल के स्कूल प्रधानाचार्य उनके अंदर छिपी हुई प्रतिभा को पहचान चुके थे इसलिए प्रधानाचार्य जी ने बछेंद्री पाल के माता – पिता को समझाया की वे बछेंद्री को आगे पढने की अनुमति दे ताकि वो पढ़-लिखकर एक अच्छा जीवन जी सके तब जाकर बछेंद्री जी का कॉलेज में दाखिला करवाया गया |

कॉलेज में दाखिला लेने के बाद भी उनका खेलो में भाग लेने का सिलसिला रुका नही था | वहां पर पढ़ते हुए उन्होंने खेलो में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया और एक दफा राइफल शूटिंग में स्वर्ण पदक भी जीता |

खेलो में भाग लेने के साथ साथ बछेंद्री जी अपने गाँव की पहली महिला थी जिन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की थी | इसके बाद भी वे रुकी नही और संस्कृत में M.A की और बाद में B.ED. की शिक्षा भी हासिल की |

बछेंद्री पाल का करियर

B.ED. करने के बाद बछेंद्री पाल जी एक शिक्षिका के रूप में काम करने लगी थी | परन्तु कुछ ही समय बाद कम वेतन , अस्थायी नौकरी और पर्वतारोही बनने के अपने सपनों को पूरा न कर पाने के कारण वे खुश नही थी | इसलिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर नेहरु इंस्टिट्यूट ऑफ़ माउंटेनियरिंग में दाखिला ले लिया जहाँ से उनके सपनो को एक नई उड़ान मिली |

सन् 1982 में नेहरु  इंस्टिट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग में अपने पाठ्यक्रम के दौरान बछेंद्री पाल जी को गंगोत्री i ( 6672मीटर ) और रुदुगैरा ( 5819 मीटर  )  पर चढाई करने का मौका मिला जिसको बछेंद्री जी ने सफलतापूर्वक पूरा किया |  इसी समय के दौरान उनको पर्वतारोही महिलाओं के साहसिक स्कूल  National Adventure Foundation में बतौर Instructer के रूप में नौकरी भी मिली |

अपने पर्वतारोहण पाठ्यक्रम को पूरा करने के तुरंत बाद बछेंद्री पाल जी को भारत के माउंट एवरेस्ट मिशन के चौथे अभियान दल में शामिल होने का मौका मिला | इस अभियान में बछेंद्री पाल जी के साथ अन्य 7 महिलाएं और 11 पुरुषों को शामिल किया गया था | चढाई के दौरान ग्लेसियर पिघलने के कारण बछेंद्री पाल और उनके दल के अन्य सदस्य घायल हो गए थे |

इसके बावजूद भी बछेंद्री पाल जी ने बिना रुके अपनी चढाई जारी रखी और 23 मई 1984 को 1 बजकर 7 मिनट पर आख़िरकार बछेंद्री पाल जी ने दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर ) पर चढ़कर अपने बचपन के सपने को साकार कर लिया था |

बछेंद्री पाल जी का विभिन्न छेत्रो में योगदान

माउंट एवरेस्ट को फ़तेह करके उन्होंने न केवल ” भारत की प्रथम महिला पर्वतारोही होने का गौरव हासिल किया बल्कि साथ ही वे पुरे विश्व में पांचवी महिला पर्वतारोही के नाम से भी जानी जाने लगी ” | अपने बचपन के सपने को साकार करने के बाद भी उन्होंने खुद को इस छेत्र में सक्रिय रखा और अनेकों अभियानों का निर्देशन भी किया | उन्होंने कॉरपोरेट को प्रशिक्षण देने , अन्य उचाईयों को छुने और नदी राफ्टिंग में महिलाओं को प्रशिक्षित करने में भी अपनी सर्वश्रेष्ठ भूमिका निभाई |

1985 में बछेंद्री पाल जी ने भारत – नेपाली एवरेस्ट अभियान महिला टीम का नेतृत्व किया इस अभियान के दौरान सात वर्ल्ड रिकॉर्ड बने जो अपने आपमें एक उपलब्धि है | 1994 में उन्होंने हरिद्वार से कोलकाता तक गंगा नदी में नौका अभियान का नेतृत्व किया इसके साथ ही उन्होंने 8 महिलाओ सहित प्रथम भारतीय महिला ट्रांस – हिमालयन अभियान का नेतृत्व भी किया जो भूटान , नेपाल , सियाचिन ग्लेशियर से होते हुए कराकोरम श्रृंखला पर समाप्त होने वाला 4500 किलोमीटर लम्बा अभियान था |

अगर वर्तमान की बात की जाए तो आज भी वे टाटा स्टील के साहसिक कार्यक्रम में मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं जहाँ पर वे मैनेजमेंट के लोगो को कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी कैसे जीवत रह सकते हैं के बारे में प्रशिक्षण देती हैं |

उपलब्धियां और सम्मान

बछेंद्री पाल जी को उनके विभिन्न छेत्रों में योगदान के लिए समय समय पर अनेको पुरस्कारों से सुशोभित किया जा चूका है | बहुत से लोग उन्हें अपनी प्रेरणा का स्त्रोत भी मानते हैं जिनमे  पहली भारतीय विकलांग महिला अरुणिमा सिन्हा  का नाम मुख्य रूप से शामिल है |

  • 1984 में CSR ( Corporate Social Responsibility )  Gold मैडल
  • 1985 में पदमश्री अवार्ड
  • 1986 अर्जुन अवार्ड
  • 1990 गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम शामिल
  • 1994 में राष्ट्रीय साहसिक अवार्ड
  • 1995 में उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा यश भारती पुरस्कार
  • 1997 में हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से पी एचडी की मानद उपाधि

दोस्तों बछेंद्री पाल जी ने जीवन के हर मोड़ पर मुसीबतों का न केवल डटकर सामना किया बल्कि साथ ही उनपर विजय भी पाई और आख़िरकार अपने सपने को हकीकत में बदला | सपने देखना अच्छी बात है पर वे सच तभी होंगे जब हम उन सपनों पर काम करेंगे |

तो दोस्तों आशा करता हूँ की आपको Bachendri Pal Biography in Hindi में पसंद आई होगी | मुझे ये कहानी लिखने में और रिसर्च करने में पुरे दो दिन लगे ताकि मै आपको बिल्कुल सही और सटीक जानकारी दे सकू अब आपकी बारी है निचे comment करके ये बताने की, की आपने Bachendri Pal Biography in Hindi से क्या सिखा |

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बछेंद्री पाल दुनिया के सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट को फतेह(30 मई सन 1984) करने वाली प्रथम भारतीय महिला हैं

Bachendri Pal in Hindi : आज हम बात करेंगे भारत की ऐसी महिला के बारे में जिन्होंने पहली बार दुनिया के सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट को फतेह कर एक नया इतिहास रच दिया|

यह बात है एक महिला द्वारा एवरेस्ट विजय की, जिसने बुलंद हौसलों और साहस का परिचय देते हुए सर्वप्रथम माउन्ट एवरेस्ट की चोटी पर कदम रखे और समस्त भारतवासियों का सर गर्व से ऊँचा कर दिया| 30 मई सन 1984 का दिन संपूर्ण भारत एवं औरतों के लिए गौरव और सम्मान का दिन था जब बछेंद्री पाल ने एवरेस्ट पर फिर से तिरंगा लहराया। चलिये दोस्तों जानते हैं। बछेंद्री पाल के जीवन के बारे में –

बछेंद्री पाल के जीवन की कहानी –

व्यक्तिगत परिचय –

  • जन्म – 24 मई 1954 (आयु 63) नकुरी उत्तरकाशी ,उत्तराखंड
  • राष्ट्रीयता – भारतीय
  • व्यवसाय – इस्पात कंपनी ‘टाटा स्टील’ में कार्यरत, जहाँ चुने हुए लोगो को रोमांचक अभियानों का प्रशिक्षण देती हैं।
  • पुरस्कार – Padma Shri in Sports

बछेंद्री पाल का शुरूआती सफर (Starting Story) –

उत्तराखंड के नकुरी गांव में जन्मी बछेंद्री पाल ने दृढ़ निश्चय का परिचय देते हुए एवरेस्ट शिखर तक पहुंचने में सफलता प्राप्त की। उन्हें बचपन से ही पर्वत बहुत आकर्षित करते थे जब वह m.a. की पढ़ाई कर रही थी तब उनके मन में पर्वत राज हिमालय की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर विजय प्राप्त करने की इच्छा जागृत हुई। अपने इस सपने को पूरा करने के उद्देश्य से उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। उन्होंने बड़ी मेहनत और लगन से पर्वतारोहण के प्लस और माइनस पॉइंट सीखें। एवरेस्ट यात्रा से पूर्व उन्होंने पर्वतारोहण संस्थान द्वारा आयोजित प्री एवरेस्ट ट्रेनिंग कैंप एक्सपीडिशन में भी भाग लिया।

सफलता की ओर कदम ( Turning Point ) –

आखिरकार 30 मई सन 1984 को ऐतिहासिक दिन आ गया जिसका सपना बछेंद्री पाल ने बचपन से देखा था। अपने लक्ष्य को पाने के लिए कठिन परिश्रम से प्रशिक्षण प्राप्त किया था। उन्होंने पर्वत विजय करके यह सिद्ध कर दिया कि महिला किसी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं है। उनमें साहस और धैर्य की कमी नहीं है यदि महिला ठान ले तो कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त कर सकती है।

एवरेस्ट विजय अभियान में बछेंद्री पाल को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। यह साहसिक अभियान बहुत जोखिम भरा था इसमें कितना जोखिम था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंतिम चढ़ाई के दौरान उन्हें 6:30 घंटे तक लगातार चढ़ाई करनी पड़ी। इनकी कठिनाई तब और बढ़ गई जब इनकी एक साथी के पांव में चोट लग गई। उन की गति धीमी हो गई थी तब वह पूरी तेजी से आगे नहीं बढ़ सकती थी। फिर भी हर कठिनाई का साहस और धैर्य से मुकाबला करते हुए आगे बढ़ती रही अंत में 30 मई सन 1984 को दोपहर 1 बजकर 07 मिनट पर वह एवरेस्ट शिखर पर थी। इन्होंने विश्व के सर्वोत्तम शिखर को जीतने वाली सर्व प्रथम पर्वतारोही भारतीय महिला बनने का अभूतपूर्व गौरव प्राप्त कर लिया था।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब बछेंद्री पाल जी से यह पूछा गया कि- ” एवरेस्ट पर पहुंचकर आपको कैसा लगा ?
तो उन्होंने उत्तर दिया – “मुझे लगा कि मेरा सपना साकार हो गया।

एवरेस्ट फतेह करने वाली पहली महिला बछेंद्री पाल जी एक विश्वविद्यालय में शिक्षिका थी। लेकिन एवरेस्ट की सफलता के बाद भारत की एक आयरन एंड स्टील कंपनी ने उन्हें खेल सहायक की नौकरी के लिए ऑफर दिया उन्होंने यह ऑफर यह सोचकर स्वीकार कर लिया कि यह कंपनी इन्हें और अधिक पर्वत शिखरों पर विजय पाने के प्रयास में सहायता, सुविधा तथा मोटिवेशन प्रदान करती रहेगी। इस समय बछेंद्री पाल जी टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन नामक संस्था में नई पीढ़ी के पर्वतारोहियों को प्रशिक्षण देने का कार्य कर रही हैं।

यह भी पढ़ें –
विश्व के प्रथम एवरेस्ट विजेता की कहानी

More Words –

तो दोस्तों यह थी भारत की प्रथम महिला जिसने दुनिया की सबसे ऊंचे शिखर माउंट एवरेस्ट को फतह कर लिया| दोस्तों अगर आपको कोई सुझाव है तो हमें नीचे कमेंट बॉक्स में लिख भेजें हमें आपकी कमेंट का इंतजार रहेगा और ऐसे ही अपडेट पाने के लिए आप हिंदी सोच को सब्सक्राइब कर सकते हैं और आपको आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर करना ना भूलें..

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